बड़ी खबर: सरकारी और निजी कर्मचारियों के लिए पेरेंट केयर लीव का तोहफा, राज्यसभा में विधेयक पेश।
नई दिल्ली/देहरादून: भारतीय समाज के पारिवारिक मूल्यों को संजोने और वृद्ध माता-पिता की देखभाल के लिए केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। राज्यसभा में पवित्र बंधन (माता-पिता देखभाल अवकाश) विधेयक, 2026 पेश किया गया है। इस विधेयक का उद्देश्य उन कर्मचारियों को राहत देना है जो अपने बुजुर्ग माता-पिता या सास-ससुर की सेवा और चिकित्सा के लिए समय नहीं निकाल पाते थे।
समाचार के मुख्य बिंदु:
* 45 दिन की सवैतनिक छुट्टी: कर्मचारी अपने पूरे सेवाकाल में अधिकतम 45 दिनों की पेरेंट केयर लीव ले सकेंगे।
* समान अधिकार: यह नियम केंद्र, राज्य सरकार, सार्वजनिक उपक्रमों और 10 से अधिक कर्मचारियों वाले निजी संस्थानों पर लागू होगा।
* वेतन सुरक्षा: इस छुट्टी के दौरान पूरा वेतन मिलेगा और इसे अन्य छुट्टियों (CL/EL) में से नहीं काटा जाएगा।
* कठोर दंड: छुट्टी देने से मना करने वाले नियोक्ताओं पर 2 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।
**केंद्र में कब लागू होगा?**
वर्तमान स्थिति के अनुसार, यह विधेयक 13 मार्च 2026 को राज्यसभा में पेश किया गया है। केंद्र में इसे पूरी तरह लागू होने के लिए निम्नलिखित चरणों से गुजरना होगा:
1. संसद की मंजूरी: इसे राज्यसभा और फिर लोकसभा दोनों सदनों से पारित होना अनिवार्य है।
2. राष्ट्रपति की सहमति: दोनों सदनों से पास होने के बाद विधेयक राष्ट्रपति के पास हस्ताक्षर के लिए जाएगा।
3. अधिसूचना: राष्ट्रपति की मंजूरी मिलते ही यह अधिनियम बन जाएगा और केंद्र सरकार राजपत्र में इसकी प्रभावी तिथि घोषित करेगी। संभावना है कि 2026 के अंत तक यह प्रक्रिया पूरी होकर केंद्र में लागू हो जाए।
**उत्तराखंड में लागू करने के लिए राज्य सरकार को क्या करना होगा?**
चूंकि यह विधेयक श्रम और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ा है, उत्तराखंड में इसे लागू करने के लिए राज्य सरकार को निम्न कदम उठाने होंगे:
1. केंद्रीय अधिनियम को अपनाना: एक बार जब केंद्र इसे कानून बना देगा, तो उत्तराखंड सरकार को अपने राज्य सेवा नियमावली में संशोधन करना होगा।
2. कैबिनेट की मंजूरी: उत्तराखंड मंत्रिमंडल को इस विधेयक के प्रावधानों को राज्य के सरकारी कर्मचारियों और निजी क्षेत्रों पर लागू करने के लिए औपचारिक प्रस्ताव पारित करना होगा।
3. नियम बनाना: कानून को लागू करने के लिए राज्य सरकार को अपने विशिष्ट नियम और शिकायत निवारण तंत्र तय करने होंगे।
**संभावित समय सीमा**
* केंद्र सरकार: संसद के आगामी सत्रों (2026) तक इस पर अंतिम मुहर लग सकती है।
* उत्तराखंड सरकार: केंद्र द्वारा कानून अधिसूचित किए जाने के लगभग 3 से 6 महीने के भीतर उत्तराखंड सरकार इसे राज्य में लागू कर सकती है।
निष्कर्ष: यह विधेयक उन कर्मचारियों के लिए संजीवनी है जिन्हें सैंडविच जनरेशन कहा जाता है। अब उत्तराखंड के हजारों कर्मचारियों को भी अपने बुजुर्गों की सेवा के लिए अपनी नौकरी या वेतन की चिंता नहीं करनी होगी।
शिक्षक भास्कर जोशी

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